चांद मोहम्मद उर्फ चंद्रमोहन से मोहब्बत, शादी और बेवफाई को लेकर कई बार मीडिया में अपनी फजीहत करा चुकीं फिजा उर्फ अनुराधा बाली अब लगता कि पूरी तरह सोचने-समझने की क्षमता खो चुकी हैं। तभी तो शायद उन्हें इस बात का भी एहसास नहीं है कि वह क्या कर रही हैं। वैसे तो फिजा पहले भी पत्रकारों के सामने अपनी बदतमीजी का परिचय दे चुकीं हैं, लेकिन अब तो ऎसा लग रहा है कि चंद्रमोहन उर्फ चांद की बेवफाई ने उनका दिमाग पूरी तरह खराब कर दिया है। इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब चंडीगढ़ में फिजा ने प्रेस कान्फ्रेंस बुलाई और फिर प्रेस कान्फ्रेंस में मौजूद पत्रकारों से ही बदतमीजी पर उतर आईं।
दरअसल हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव के सिलसिले में फिजा ने प्रेस कान्फ्रेंस बुलाई थी। इसके लिए बाकायदा पत्रकारों को न्योता दिया गया था। लेकिन जब उनसे पत्रकारों के सवालों का जवाब देते नहीं बना तो वह आपे से बाहर हो गईं। फिजा न सिर्फ प्रेस कान्फ्रेंस बीच में ही छोड़ कर चलती बनीं, बल्कि मंच से उतरते वक्त भी पत्रकारों से उलझ गईं। सारी सीमाएं लांघते हुए फिजा ने यह कह दिया कि अगर किसी ने कुछ ऎसा-वैसा पूछा तो उनके पैर में भी चप्पल है। फिजा की इस बेहूदगी से खफा चंडीगढ़ प्रेस क्लब ने उनके प्रवेश पर रोक लगा दी है।
असल में मोहब्बत में मात खाने के बाद से खार खाईं फिजा समय-समय पर प्रेस कान्फ्रेंस बुलाकर अपने प्रेमी और हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्र मोहन उर्फ चांद और उनके पिता भजनलाल के खिलाफ जहर उगलती रहती हैं। मीडिया भी हर बार उनको खूब कवरेज देता रहा है। शायद इसीलिए फिजा का भी दिमाग खराब हो गया और उन्होंने सारी सीमाएं भूलकर पत्रकारों से ही बेहूदगी कर डाली। नतीजा यह हुआ कि प्रेस कान्फ्रेंस खत्म होने से पहले ही प्रेस क्लब की फिजा बदल गई। सैंडिल चलाने की धमकी देने वाले आपत्तिजनक बयानसे नराज पत्रकारों ने फिजा को प्रेस क्लब की पार्किंग में ही रोक लिया और उनकी कार गेट से बाहर नहीं निकलने दी। पत्रकारों ने फिजा से कहा कि पहले वह माफी मांगे, तभी बाहर जा सकेंगी। इस पर ड्राइविंग सीट पर बैठी फिजा का चेहरा तमतमा गया। काले चश्मे के पीछे से घूरती वह फ्लैश-लाइट और टीवी कैमरों के आगे माफी न मांगने पर अड़ी रहीं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने फिजा से पूछा कि चंद्र मोहन उर्फ चांद के बारे में तो बहुत कुछ कहा गया है, अब जरा आप अपना बैकग्राउंड भी तो बताइए। इतना सुनना ता कि फिजा आपे से बाहर हो गईं। वह कॉन्फ्रेंस हॉल के बाहर निकल गईं। क्लब के पोर्च में फिजा ने पत्रकार को टोकते हुए कहा कि आप जैसे सवाल कर रहे थे, अगर मैंने कुछ ऐसा-वैसा कह दिया तो...। इस पर पत्रकार ने भी कहा कि अगर उसने भी कुछ और सवाल कर लिए तो? बस फिर क्या था तमतमाई फिजा पलटीं और कहा कि, कुछ कहा तो मेरे पैर में भी चप्पल है। यह सुनते ही पत्रकार हैरत में पड़ गए। इसके बाद क्लब का गेट बंद करा दिया गया। क्लब के अध्यक्ष सर्वजीत पंधेर ने फिजा से अपनी हरकत के लिए पत्रकारों से माफी मांगने को कहा, लेकिन फिजा ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। इस पर पंधेर ने कहा कि पत्रकारों के साथ फिजा की बेहूदगी कोई नई बात नहीं है। इसलिए क्लब में फिजा की एंट्री प्रतिबंधित कर दी गई है।
वैसे फिजा का यह व्यवहार मीडिया के लिए भी सबक है जो हाइप्रोफाइल मामला देखते ही उसके पीछे आंख बंद कर दौड़ने लगता है। फिजा और चांद के मामले में भी मीडिया खासी अपरिपक्वता दिखाई है। दोनों को पहले तो किसी बंबइया फिल्म के करेक्टर्स की तरह पेश किया गया और फिर जब भी मौका आया दोनों को लेकर जमकर चटपटी खबरें परोसी गईं।
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