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जी की जय, बाकी चैनलों के लिए मंदी बनी शोषण का हथियार  zeen

एक तरफ जहां ज्यादातर मीडिया हाऊस मंदी का रोना रोकर कर्मचारियों की तनख्वाह कम करने और छंटनी के बहाने तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के सबसे बड़े मीडिया ग्रुप जी नेटवर्क ने इस दौरान अपने आंतरिक खर्चों में कटौती करके 5 करोड़ रुपये की बचत की है। इस फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में ज्यादातर मीडिया हाउस ने अपनी कंपनी को घाटे में दिखाया है। मोटा फायदा कमाने वाले मीडिया हाउस भी अपनी कंपनी को तगड़ा घाटा दिखा रहे हैं। अखबारों और वेबसाइटों में बाकायदा प्रेस नोट छपवाकर घाटे का ढिंढोरा पीट रहे हैं। मंदी के नाम पर कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं। मालिकान यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वो बहुत बुरी हालत में हैं।

एनडीटीवी, न्यूज एक्स, न्यूज 24, इंडिया न्यूज, वीओआई जैसे चैनलों के मालिकों ने तो मंदी का जमकर फायदा उठाया है। मंदी को कर्मचारियों के शोषण का हथियार बना लिया। न्यूज एक्स ने कई बार थोक में कर्मचारियों को निकाला और उसके बाद तो चैनल तक बेच दिया गया। इस‌ी तरह न्यूज 24 में भी चुपके-चुपके कई बार कर्मचारियों की छंटनी की गई। हालत यह है कि इस चैनल में अब गिने-चुने चेहरे ही बचे हैं। बीएजी ग्रुप के दूसरे चैनल ई 24 में भी कई लोगों को लाया गया और फिर नौकरी स‌े निकाले जाने का फरमान स‌ुना दिया गया। हालात इतने बुरे हो गए कि चैनल को मुंबई स‌े नोएडा शिफ्ट कर दिया गया। बॉलीवुड का पहला खबरिया चैनल होने का दावा करने वाले ई24 के पास तो एक भी चेहरा ऎसा नहीं है जिसे इंडस्ट्री में कोई खास पहचान हासिल हो। इंडिया न्यूज का हाल भी बुरा है। बड़े चैनलों स‌े जितने लोग लाए गए थे, उनमें स‌े ज्यादातर नौकरी छोड़कर जा चुके हैं। इंडिया न्यूज, न्यूज 24 और वीओआई में कुछ लोगों के लिए तो जानबूझकर ऎसे हालात बना दिए गए कि वो मजबूरन नौकरी  छोड़कर चले गए। इंडिया न्यूज में जमकर छंटनी की गई। वीओआई में कभी छंटनी हुई तो कभी बड़ी तादाद में लोग खुद ही नौकरी छोड़कर चले गए। अब तो खैर चैनल ही बंद हो चुका है।


जी नेटवर्क ने आंतरिक खर्चों में कटौती करके बचाए 5 करोड़ रुपये 

जी मैनेजमेंट ने ईमेल भेजकर कर्मचारियों का शुक्रिया अदा किया

छोटे और मध्यम दर्जे के चैनल कर्मचारियों के शोषण में अव्वल

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स‌हारा स‌मय, न्यूज एक्स, न्यूज 24, इंडिया न्यूज और वीओआई जैसे चैनलों में पहले तो बड़े चैनलों स‌े तोड़कर, बड़े-बड़े स‌ब्जबाग दिखाकर लोगों को लाया गया और फिर मंदी के नाम पर नौकरी स‌े निकाल दिया गया। इन चैनलों के मैनेजमेंट की वजह स‌े मीडिया इंडस्ट्री में बेरोजगार होने वालों की एक लंबी फौज है। इनमें पत्रकारों के अलावा टेक्निकल स्टॉफ भी शामिल हैं। आज की तारीख में ज्यादातर छोटे और मध्यम श्रेणी के चैनल मंदी के नाम पर पत्रकारों का शोषण करने पर उतारू हैं। कहीं वक्त पर तनख्वाह नहीं दी जा रही है तो कहीं स‌ालों पुरानी स‌ैलरी पर काम कराया जा रहा है। स‌हारा और एनडीटीवी जैसे बड़े ग्रुप ने भी मंदी के नाम पर ढेरों लोगों को नौकरी स‌े निकाल दिया। आज तक, आईबीएन, स्टार ने मंदी के दौर में भी जमकर कमाई की है। इसके बावजूद इन चैनलों में भी कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोत्तरी नहीं की गई।

ऎसे स‌मय में जी नेटवर्क वाकई में बधाई का हकदार है। बढ़ोतरी तो यहां भी नहीं हुई। लेकिन यहां मंदी का रोना नहीं रोया गया। मंदी के दौर स‌े उबरने के लिए जी नेटवर्क ने जो तरीका अपनाया वह काबिल-ए-तारीफ है। जी नेटवर्क ने छंटनी अभियान चलाना तो दूर, मंदी के नाम पर किसी को नौकरी स‌े नहीं निकाला। इसकी बजाय जी ने अपने आतंरिक खर्चों और फिजूल खर्ची पर लगाम लगाई। इसका नतीजा यह हुआ कि पहली छमाही में जी नेटवर्क ने इस कटौती की वजह स‌े 5 करोड़ की बचत की है। जी नेटवर्क ने बाकायदा ईमेल भेजकर अपने आतंरिक खर्चों में कटौती से हुई बचत के बारे में अपने कर्मचारियों को बताया है। जी नेटवर्क के सभी कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में इस सहयोग के लिए कर्मचारियों का धन्यवाद किया है। उन्हें बधाई दी गई है। ईमेल में कहा गया है कि कर्मचारियों के इस सहयोग से न सिर्फ कंपनी को मजबूती मिलेगी, बल्कि गैरजरूरी खर्चों में लगाम लगाकर मंदी से हुए नुकसान की भरपाई भी हो सकेगी। ईमेल में जी नेटवर्क के सभी डिपार्टमेंट मसलन एडमिनिस्ट्रेशन, एचआर, एकाउंट, बिजनेस और ऑडिट का भी धन्यवाद किया गया है। जी नेटवर्क ने पांच करोड़ की रुपये की ये बचत इस फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही के दौरान की है। इस बचत को 42 फीसदी बताया गया है। उम्मीद जतायी गई है कि यह सिलसिला आगे भी कायम रहेगा।

जी नेटवर्क की एक औऱ कामयाबी का जिक्र जरूरी है। मंदी के दौर में जी नेटवर्क ने जी न्यूज उत्तर प्रदेश नामक एक नया न्यूज चैनल लांच किया। चुनाव के दौरान तो इस चैनल ने उत्तर प्रदेश के स‌भी रीजनल चैनल को धकियाकर नंबर वन की कुर्सी तक हथिया ली थी। हालांकि इस वक्त चैनल नंबर वन की पदवी पर नहीं है। लेकिन यह चैनल अच्छा कर रहा है और यूपी के दर्शकों के बीच अपनी पहचान भी बना चुका है। हाल ही में इस चैनल में उत्तर प्रदेश पर आधारित कई खास कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इसे जी नेटवर्क के कामयाब चैनलों की फेहरिस्त में शुमार किया जा चुका है। इस चैनल की चर्चा इसलिए करना जरूरी है कि इसे उस वक्त स‌फलता पूर्वक लांच किया गया जब देश के बाकी मीडिया हाउस मंदी-मंदी चिल्लाकर आंसू बहा रहे थे। दूसरे चैनलों में मंदी का यह शोर अब भी कायम है और शायद आने वाले वक्त में भी कायम ही रहेगा।


न्यूज चैनल के लिए तत्काल चाहिए

मीडिया में नौकरी दिलाने वालों स‌े स‌ावधान

भविष्य के पत्रकारों का स‌ामान्य ()ज्ञान

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का शार्ट कट 

चैनल में अफेयर न होने का अफसोस

स‌ेब बेचने वाली टीवी एंकर...

मत पीटिए मीडिया के 'प्रोफेशनल' होने का ढिंढोरा

शर्मसार करता एक 'जनवादी' अखबार

मीडिया को क्यों चाहिए आजादी?

वह न्यूज चैनल का प्रोड्यूसर है

चौथी दुनिया का मिथक

स‌ो रहा है मीडिया !

रेडियो मिर्ची की दिलचस्प कहानी

बिहारी हो, तो मीडिया में नौकरी पक्की!

अखबार के स‌ंपादक के नाम पाठक का पत्र

  • वेब दुनिया ने रचा कामयाबी का इतिहास

    दुनिया के पहले हिन्दी पोर्टल की दसवीं सालगिरह
     
    हिंदी पोर्टल वेब दुनिया डॉट कॉम ने 23 सितंबर को अपनी कामयाबी के दस स‌ाल पूरे कर लिए हैं। 23 सितंबर, 1999 को शुरू हुई वेबदुनिया आज हिन्दी के साथ-साथ पंजाबी, मराठी, गुजराती बंगला, मलयालम, कन्नड़, तमिल और तेलुगू भाषा में भी अपना वर्चस्व स्थापित कर रही है। दुनिया का यह पहला हिन्दी पोर्टल न सिर्फ भाषा के स्तर पर भरोसेमंद स‌ाबित हुआ है, बल्कि शैली, शिल्प, विषयवस्तु और विविधता के मामले में भी बेहतर स‌ाबित हुआ है।

    एक दशक पहले भारत में बढ़ते व्यापार और विकास की दर को देखते हुए जरूरत महसूस की गई कि लोगों को उनकी भाषा में सामग्री पहुंचाई जाए। इंटरनेट में हिंदी को लेकर कई तरह की शंकाएं थीं। इसे पूरी तरह से अंग्रेजी भाषा का माध्यम माना जाता था। वास्तव में हिंदी में पोर्टल की शुरुआत यह सोचकर की गई थी कि इंटरनेट जनसंचार का अत्यंत सुगम माध्यम बनता जा रहा है और देश में इसकी पहुंच जन-जन तक बनाने के लिए हिन्दी और दूसरी भारतीय भाषाओं का सहयोग अहम साबित होगा।

    यही नहीं वेबदुनिया के जरिये भाषा के स्थानीयकरण (लोकलाइजेशन) जैसा विचार भी उपजा। यानी विदेशी भाषा की विषय सामग्री को भारत की भाषा के अनुकूल अनुवाद करना। इस दिशा में वेबदुनिया की कोशिशें काफी रंग लाईं। वेबदुनिया की शुरुआत एक क्रांति की तरह हुई जिसने इंटरनेट की दुनिया में एक खास रास्ता बनाया। वेबदुनिया ने पोर्टल के तौर पर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय समाचारों से खेल जगत तक, महिलाओं के संसार से साहित्य जगत तक, बच्चों की दुनिया से बॉलीवुड तक, करियर से लेकर ज्योतिष तक को अपने आप स‌े स‌मेटा है। वेबदुनिया की कई सेवाएं ऐसी हैं जिनके जरिये यूजर सीधे लाभ उठा सकते हैं। मसलन ज्योतिष चैनल के जरिये कुंडली बनवाना, पत्रिका मिलान और भविष्य से संबंधित सवाल पूछे जा सकते हैं।

    ब्लॉग- वेबदुनिया की ब्लॉग सेवा ’माय वेबदुनिया’ ने उन लेखकों के लिए एक विशाल कैनवास दिया है जिनकी अभिव्यक्ति प्रकाशन के रास्ते नहीं तलाश पा रही थी। आज इस सेवा ने नवोदित से लेकर स्थापित लेखकों तक अनुभूतियों का इन्द्रधनुष रच दिया है। आपकी लेखनी, आपका समय, आपका स्थान और आपके विचार कभी भी और कहीं भी बैठकर इसे अपडेट किया जा सकता है। माय वेबदुनिया युवा रचनाकारों के लिए आदर्श ब्लॉग सेवा बनकर उभरी है। सही मायनों में आज वेबदुनिया बधाई की हकदार है। आने वाले वक्त में वेब  दुनिया नई ऊंचाइयां हासिल करे, वॉयस ऑफ मीडिया की तरफ स‌े ढेरों शुभकामनाएं।

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