दारों के चैनल खोलने पर सरकार फिक्रमंद एक तरफ भारतीय टेलीविजन कारोबार में चैनलों की तेजी से बढ़ती तादाद, तो दूसरी तरफ चैनलों की गिरती साख से फिक्रमंद केंद्र सरकार अब अपनी मौजूदा चैनल लाइसेंसिंग पॉलिसी में भारी बदलाव लाने की तैयारी कर रही है। एक अहम फैसले के तहत नए चैनलों को लाइसेंस देने से संबंधित मौजूदा दिशा-निर्देशों की गहरी समीक्षा की जा रही है। सरकार की फिक्रकी एक वजह यह भी है कि नए चैनल शुरू करने वालों में से कई लोगों का बैकग्राउंड संदिग्ध है। इन चैनलों के मालिकान का मीडिया से कोई लेना-देना नहीं है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी का कहना हैकि हम ढेरों चैनलों को लाइसेंस देने की मौजूदा नीति पर दोबारा विचार कर रहे हैं। चैनलों की तादाद लगातार बढ़ रही है। हमारे पास सीमित स्पेक्ट्रम उपलब्ध हैं, जिनका हमें सही इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए हमें कुछ नई नीतियां बनानी होंगी।
सूत्रों के अनुसार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नेरेगुलेटर ट्राई को लिखा है कि वह उन्हें सुझाए कि कितने और चैनलों की गुंजाइश इस मुल्क में है और चैनलों की तेजी से बढ़ रही तादाद पर कैसे लगाम लगाई जाए। ट्राई को भेजी गई एक चिट्ठी में मंत्रालय ने चिंता जतायी है कि नए चैनल शुरू करने वालों में बिल्डर, ठेकेदार, शिक्षा माफिया, स्टील व्यापारी जैसे लोग हैं। इन लोगों कामीडिया से कोई ताल्लुक नहीं है। नई व्यवस्था में यह भी देखा जाएगा कि चैनल लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले का मीडिया में क्या अनुभव है। उसकी कंपनी की आर्थिक हालत ऎसी होनी चाहिए कि वह तीन साल तक लगातार चैनल चलाने की क्षमता रखता हो। इसके अलावा चैनल में काम करने वाले लोंगों को रोजगार गारंटी जैसे मुद्दे भी शामिल किए जा सकते हैं।
अब आया 'यूएनआई टीवी'
रोजाना 40 आडियो-वीडियो क्लिप मुहैया कराएगा यूएनआईटीवी
टेलीविजन न्यूज एजेंसी की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने किया सेवा का शुभारंभ
एजेंसी पत्रकारिता में पहले से स्थापित देश की प्रमुख न्यूज एजेंसी 'यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया' (यूएनआई) ने अब टीवी न्यूज की दुनिया में भी कदम रख दिया है। टीवी को खबरें और विजुअल मुहैया कराने के लिए एजेंसी ने 'यूएनआई टेलीविजन' नाम से एक नई सर्विस शुरू की है। देश-विदेश में फैले अपने नेटवर्क और मंझे हुए पत्रकारों की बदौलत यूएनआई की यह सेवा टेलीविजन चैनलों एवं दूसरे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को ताजे समाचार, फीचर स्टोरी और खबरों की आडियो-वीडियो क्लिपिंग मुहैया कराएगी। इस सेवा के जरिये टेलीविजन चैनलों को नेशनल और इंटरनेशनल स्तर की खबरों की कमी दूर होगी। यूएनआई टीवी के लिए एजेंसी ने सी-वोटर के संचालक यशवंत देशमुख के साथ समझौता किया है। [पूरा पढ़ें]
पिछले कुछ महीनों में मंत्रालय को शिकायतें मिलीहैं कि चैनल शुरू करने में मदद करने वाले कुछ स्वघोषित एजेंट और दलाल मोटा पैसा लेकर चैनल शुरू करवाने का धंधा चला रहे हैं। सरकार ने अभी तक 498 चैनलों को लाइसेंस दिया है।150 नए चैनलों के आवेदन मंत्रालय के सामने अभी विचाराधीन हैं। नए चैनलों को प्रसारण के लिए लाइसेंसलेने के लिए गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, विदेश मंत्रालय से क्लीन चिट लेनी होती है। आखिर में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय चैनल के लिए लाइसेंस जारी करता है। (हिंदुस्तान)
रोकना ही होगा अखबारों के इस 'काले धंधे' को
जारी है अखबारों में 'मिलावट' के खिलाफ मुहिम
मत पीटिए मीडिया के 'प्रोफेशनल' होने का ढिंढोरा
रेडियो मिर्ची की दिलचस्प कहानी
मीडिया में नौकरी दिलाने वालों से सावधान
खबरें जाएं भाड़ में, मुनाफा तो मनोरंजन में है
पत्रकार बेचारा, काम के बोझ का मारा
न्यूज चैनल में डाकू का 'एक्सक्लूसिव' सरेंडर
पांच मंडल के पत्रकारों को मान्यता की हरी झंडी
क्यों नहीं कर पाए सच का सामना?
दोबारा शुरू हुआ एग्रीग्रेटर ब्लॉगवाणी
कामयाबी उम्मीदें बढ़ाती है: विजेंद्र
शर्मसार करता एक 'जनवादी' अखबार