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VOM Interview

  • कामयाबी उम्मीदें बढ़ाती है: विजेंद्र 

    Live indदुनिया के नंबर वन बॉक्सर बनने का गौरव हासिल कर चुके विजेंद्र सिंह अब देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहते हैं। 75 किलोग्राम कैटेगरी में  दुनिया के नंबर एक मुक्केबाज़ बनने के बाद विजेंद्र सिंह ने लाइव इंडिया के स्टूडियो में एंकर डॉ. प्रवीण तिवारी के साथ लाइव बातचीत की। विजेंद्र ने कहा कि ब्रांज़ मैडल सुन-सुनकर उनके कान पक गए हैं। अब वह गोल्ड मैडल जीतना चाहते हैं। विजेन्द्र मानते हैं कि क़िस्मत उन पर मेहरबान है। इसके लिए कड़ी मेहनत को तो वह श्रेय देते ही हैं, साथ ही साथ उनका ये भी कहना है कि वक़्त भी अच्छा बुरा होता है। वक़्त अच्छा है तो क़ामयाबी हासिल होती रहेंगी। विजेन्द्र किस्मत पर भी यकीन करते हैं लेकिन ज्योतिष पर नहीं। अपना फ़लसफ़ा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जो होना है वो तो होगा ही, चाहे अच्छा हो या बुरा। विजेन्द्र मानते हैं कि क़ामयाबी डर भी बढ़ाती है। देश की उम्मीदें बढ़ जाती हैं। हर कंपटीशन में मैडल जीतने के दबाव के साथ खेलना पड़ता है।
     

    विजेन्द्र हिन्दुस्तानी फ़िल्मों के साथ-साथ हॉलीवुड की एक्शन फ़िल्मों के बड़े फैन है। उन्हें आज का वक़्त सपनीला लगता है। कुछ साल पहले तक जिन बड़े-बड़े सितारों के पोस्टर उनके कमरे में लगे होते थे, आज वह खुद उनके साथ मिलकर कई बड़े ब्रांड्स को प्रमोट रहे हैं। विजेंद्र शाहरुख़ ख़ान के साथ दिखे। सलमान ने उन्हे दस का दम में और फरहा ने तेरे मेरे बीच में बुलाया। विजेंद्र को कई बड़े बैनर की फ़िल्मों के ऑफ़र भी मिले हैं, लेकिन अभी उन्होंने फ़िल्मों से दूर रहने का फ़ैसला किया है। बकौल विजेन्द्र, ऐसा वो अपने फेवरेट हीरो अक्षय कुमार के कहने पर कर रहे हैं। अक्षय ने विजेन्द्र से कहा है की अभी बहुत वक्त है, फ़िलहाल खेल पर ध्यान दो। फ़िल्में तो मिलती रहेंगी।
     

    vijविजेन्द्र का कहना है कि पुरस्कारों का तब तक कोई फ़ायदा नहीं जब तक पूरे देश में बॉक्सिंग को सम्मान की नज़र से न देखा जाए। ऐसा वह इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बीजिंग से जीतकर लौटने के बाद उनसे कई वादे किये गए थे, जो पूरे नहीं हुए। इन वादों में एक अच्छी बॉक्सिंग एकेडमी खोलने का वादा भी था। विजेन्द्र देश में एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बॉक्सिंग ऐकेडमी खोलना चाहते हैं। देश को बड़ी तादाद में अच्छे बॉक्सर देना चाहते हैं। उनका ये भी कहना है कि क्रिकेट ही देश में खेलों का भगवान है। दूसरे खेल उपेक्षित रह जाते हैं। बॉक्सिंग की हालात बहुत अच्छी नहीं है। अभी बॉक्सिंग का अच्छा दौर है। बॉक्सर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हमें सम्मान भी मिल रहा है। लेकिन इस कामयाबी को कायम रखने के लिए के लिए ज़रुरी है कि बॉक्सर्स को अच्छी सुविधाएं भी मिलें। बातचीत के आखिर में विजेन्द्र ने वादा किया कि वह कॉमनवेल्थ में ब्रांज नहीं, बल्कि गोल्ड जीतकर फिर लाइव इंडिया के स्टूडियों में दर्शकों से रूबरू होंगे।

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