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  • इतिहास हो गया जियो-स‌िटीज

    Gजियो-सिटीज इतिहास हो गया। 1999 में 3.7 अरब डालर के निवेश से याहू समूह में शामिल किया गया जियो-सिजीज याहू के लिए ऐसा घाटे का सौदा साबित हुआ कि आखिरकार याहू ने उसे इसी साल अप्रैल में बंद करने का ऎलान कर दिया। आखिरकार 26 अक्टूबर, 2009 को जियो स‌िटीज को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया गया। ऐसा क्या हुआ कि भारी-भरकम निवेश के बाद याहू ने जियो-सिटीज को छोड़ दिया? उन उपभोक्ताओं का क्या हुआ होगा जो इंटरनेट पर इस सेवा का उपयोग करते थे? इसे समझने से पहले हम यह समझ लें कि जियो-सिटीज आखिर था क्या?

    जियो सिटीज किसी भी उपभोक्ता को अपना वेब पेज बनाने की सुविधा देता था। इंटरनेट और डॉट कॉम की उभरती ताकतके बीच 1999 में जब याहू ने जियो सिटीज को खरीदा था तो इरादा इंटरनेट पर लोगों को अपनी छोटी वेबसाइटों के जरिए जोड़ने का था। आज से दस साल पहले इंटरनेट पर वेबसाइट के नाम पर एचटीएमएल पेजेज के नाम से मशहूर स्टेटिकल वेबसाइट ही चलन में थीं जो इंटरनेट के आधुनिकीकरण में पीछे छूट गयीं। जियोसिटीज के पीछे संभवत: याहू इंटरनेट पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ना चाहता था इसलिए छोटे व्यापारियों, निजी रूप से अपनी वेबसाइट बनानेवालों के लिए यह बेहतर अवसर हो सकता था। लेकिन यह हुआ नहीं। समय बदला, टेक्नालाजी बदली और जैसे गूगल ने हर तरहसे याहू के सामने चुनौती पेश की थी उसी तरह से जियोसिटीज के सामने ब्लॉगस्पाट पेशकरके चुनौती दे डाली।

    CLजियोसिटीज ने वक्त के साथ खुदको अपडेट नहीं किया और उसकी वेबसाइट बनाने से लेकर होस्ट करने का कांसेप्ट फेल हो गया।जबकि इसी कांसेप्ट परगूगल ने ब्लागस्पाट बनाकर याहू कोमात दे डाली जो आगे चलकर ब्लाग के रूप में मशहूर हुआ। याहू से उलट गूगल ने उपभोक्ताओं से कोई कीमत नहीं ली और विज्ञापन की भी सुविधा दे दी। ऐसे में जियोसिटीज को नाकामतो होना ही था। बीबीसी ने भी जियोसिटीज के खात्मे पर लिखा है कि वक्तके बदलाव के साथ जियोसिटीज अपने आप को बदल नहीं पाया और जियोसिटीज का उपयोग करनेवाले उपभोक्ता सोशल नेटवर्किंग वेवबसाइटों की ओर मुड़ गये। इंटरनेट पर जेडनेट पोर्टल के संपादक ने भी लिखा है कि यह एक युग का अंत है।

    जियोसीटिज ने सबसे पहले इंटरनेट पर लोगों को इतनी आसानी से मौजूद होने का मौका दिया था। जियोसिटीज के खात्मे के लिए उसकी तकनीक, कार्यशैली और वेब के साथ जुड़ी उसकी समझ भी जिम्मेदार है। लेकिन जिस दौर में जियोसिटीज अस्तित्व में आया था इंटरनेट का वह दौर इतना निखरा हुआ नहीं था जैसा कि आज है। आज से दस साल पहले इंटरनेट एकांगी माध्यम था जहां आप सिर्फ सूचनाएं देने और लेने का काम करते थे। लेकिन तकनीक के लगातार विकसित होने के साथ ही इंटरेक्शन का दौर शुरू हुआ और वेब डिजाइन और तकनीक में भी व्यापक बदलाव हुए। मसलन सबडोमेन की तकनीक विकसित होने के बाद यह संभव हो गया कि एक ही डोमेन पर आप लाखों करोड़ों पन्ने क्रियेट कर सकते हैं। ऊपर से गूगल ने इंटरनेट युग में एक नये दर्शन का सूत्रपात किया। वह दर्शन था उपभोक्ता को मुफ्त सेवा देने का। गूगल के उद्भव और विकास में एक बात साफ दिखती है कि वह अपनी अधिकांश सेवाओं के लिए प्रयोक्ता से पैसा लेने की बजाय अपने शेयरधारकों से पैसा वसूल करता है जिनके सामने प्रयोक्ताओं को अपना यूजर बनाकर प्रस्तुत करता है।

    इसके अलावा जियोसिटीज से उलट गूगल ने ब्लाग के जरिए अपने प्रयोक्ताओं को अपनी कमाई का साझीदार बनाने का झांसा भी दिया जिसके कारण ब्लागर जियोसीटिज पर भारी पड़ गया। अपने मुफ्त के दर्शन के तहत गूगल ने जितनी अन्य सेवाएं शुरू की वे सब आपस में जुड़ती गयीं और गूगल एक महारथी बनता चला गया जबकि याहू की जियोसिटीज अप्रासंगिक होती गयी। ऐसा नहीं है कि जियोसीटिज के सामने ही संकट खड़ा हुआ हो। ब्लागर की तर्ज पर माइक्रोसाफ्ट में माइस्पेस नामक वेब पन्ना उपलब्ध कराने की पेशकश की लेकिन वह भी सफल नहीं हुआ। हालांकि यह सेवा अभी जारी है लेकिन माइक्रोसाफ्ट इसे लेकर कोई बहुत अधिक उत्साहित दिखाई नहीं देता।

    गूगल की सेवाओं ने भले ही याहू और माइक्रोसाफ्ट के सामने चुनौती पेश की हो लेकिन गूगल का राज भी निष्कंटक नहीं है। गूगल की सोशल नेटवर्किंग के सामने फेसबुक ने जबर्दस्त चुनौती पेश कर दी है और फिलहाल फेसबुक को खरीदने की क्षमता गूगल के पास नहीं है इसलिए उसने आर्कुट को और मजबूत कर दिया है। गूगल के सामने चुनौती केवल फेसबुक ने ही नहीं पेश की है, ट्विटर और अन्य छोटी बड़ी कई माइक्रोब्लागिंग साइटें गूगल की ब्लागर सेवा के सामने चुनौती पेश कर रही हैं जिसके सामने समझौता करते हुए गूगल ने आखिरकार ट्विटर की माइक्रोपोस्ट को भी सर्च में शामिल करने का समझौता कर लिया है। निश्चित रूप से आज तकनीक के जिस पहलू ने जियोसीटिज को बंद होने पर मजबूर कर दिया है वही तकनीक अब गूगल के ब्लागर के सामने भी चुनौती पेश कर रही है। गूगल इससे कैसे निपटेगा यह दिलचस्प होगा। (देवभाषा)

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