बहुत याद आएंगे प्रभाष जोशी
गाजियाबाद। हिंदी पत्रकारिता में नित नए प्रतिमान स्थापित करने वाले मशहूर पत्रकार प्रभाष जोशी नहीं रहे। 73 बरस के प्रभाष जोशी का गाजियाबाद के नरेंद्र मोहन अस्पताल में गुरुवार की शाम निधन हो गया। उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई। प्रभाष जोशी ने पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक नई दुनिया से की थी। 1983 में वह जनसत्ता के संपादक बन गए।1995 में अखबार से रिटायर होने बाद भी वह संपादकीय सलाहकार के तौर पर जनसत्ता का हिस्सा बने रहे। उनकी अगुवाई में जनसत्ता एक ऎसे अखबार के रूप में स्थापित हुआ जो बेखौफ होकर सच लिखता है। प्रभाष जोशी की जनसत्ता को दी गई यह पहचान आज भी कायम है। विचारों से गांधीवादी प्रभाष जोशी की समकालीन राजनीति के साथ क्रिकेट में गहरी दिलचस्पी थी। सचिन तेंदुलकर उनके पसंदीदा क्रिकेटर थे। भारत-आस्ट्रेलिया मैच में सचिन की शानदार पारी के बाद सुबह लोग जनसत्ता में क्रिकेट पर उनके आलेख का इंतजार कर रहे थे। लेकिन क्रिकेट पर प्रभाष जोशी के लेख की बजाय अखबार में आई उनकी मौत की खबर। प्रभाष जोशी का जाना यकीनन हिंदी पत्रकारिता के एक युग का अंत है।
ब्लैकमेलर पत्रकार लड़की समेत गिरफ्तार
पटियाला। पुलिस ने दो ऐसे तथाकथित पत्रकारों को गिरफ्तार किया है, जिनकी कारगुजारी ने पत्रकारिता के पेशे को शर्मसार कर दिया है। टीवी चैनल के ये पत्रकार पहले तो लड़कियों के जरिये लोगों को अपने जाल में फंसाते थे और फिर ब्लैकमेल करके मोटी रकम ऐंठते थे। इनके इशारे पर काम करने वाली लड़कियां लोगों को जाल में फांस कर किसी होटल या गेस्ट हाउस में ले जाती थीं। उसके बाद ये पत्रकार लड़की के साथ आए व्यक्ति को चोरी-छिपे शूट कर लेते थे। शूटिंग के बाद शुरू हो जाता था ब्लैकमेलिंग का खेल। पकड़े गए पत्रकार जाल में फंसे व्यक्ति को यह कहकर ब्लैकमेल करते थे कि पैसे दो वर्ना उनकी फिल्म टीवी चैनल में चला देंगे। इस शातिराना तरीके से पटियाला के ये पत्रकार अब तक ना जाने कितने लोगों को ब्लैकमेल करके उनसे मोटी रकम ऐंठ चुके हैं। लेकिन इन पत्रकारों को तब लेने के देने पड़ गए जब इन लोगों ने कैथल के अजीबगढ़ गांव निवासी सुच्च सिंह नाम के एक व्यक्ति को इसी तरह अपने जाल में फांस लिया। ब्लैकमेलर पत्रकारों ने सोचा था कि सुच्च सिंह भी शायद उनकी धमकियों से डर जाएगा और मोटी रकम उनके हवाले कर देगा। लेकिन सुच्च सिंह ने पुलिस को शिकायत कर दी।
पुलिस में दी गई शिकायत के मुताबिक ब्लैकमेलर पत्रकारों ने सुच्च सिंह से कहा कि अगर वह दो लाख रुपये नहीं देगा तो उसकी कथित ब्लू फिल्म चैनलों पर चला दी जाएगी। शुरू में तो सुच्च सिंह भी घबरा गया। उसने 80 हजार रुपये में सौदा भी तय कर लिया। लेकिन बाद में सुच्च सिंह ने हिम्मत दिखाई और पुलिस को खबर कर दी। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर दो पत्रकारों को एक लड़की के साथ रंगे हाथ धर दबोचा। इस मामले में पटियाला के थाना कोतवाली में एक लड़की समेत छह लोगों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का मामला दर्ज किया गया है। तीन लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। बाकी की तलाश जारी है। लड़की के अलावा जिन पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है वो न्यूज चैनल के पत्रकार बताए जाते हैं।
साधना न्यूज ने बांटा बोनस
शर्म करें मंदी का रोना रोकर शोषण करने वाले चैनल
वीओएम डेस्क। हिंदी भाषी राज्यों में क्षेत्रीय चैनलों की कामयाबी का झंडा गाड़ने वाले साधना ग्रुप ने एक और इतिहास रच दिया है। ऎसे वक्त में जब ज्यादातर मीडिया ग्रुप मंदी का रोना रोकर अपने कर्मचारियों का शोषण करने पर उतारू हैं, साधना ग्रुप ने अपने कर्मचारियों को दिवाली पर बोनस देकर सबको आईना दिखा दिया है। इसके लिए साधना के मालिकान और मैनेजमेंट वाकई में तारीफ के हकदार हैं। पता चला है कि चैनल में पांच हजार से लेकर पचास हजार रुपये तक बोनस के तौर पर बांटे गए हैं। इतना ही नहीं चैनल में जूनियर लेवल के कर्मचारियों को इन्क्रीमेंट भी दिए जाने की खबर है।
साधना न्यूज़ ने अपने बिहार-झारखंड और एमपी-छत्तीसगढ़ चैनलों के करीब सभी कर्मचारियों को इन्क्रीमेंट देने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि यह इन्क्रीमेंट जनवरी से दिया जाएगा। अच्छी बात यह है कि प्रमोशन में कर्मचारियों के काम और वरिष्ठता का भी खयाल रखा गया है। एक और खास बात यह है कि महज एक महीने पहले नौकरी ज्वाइन करने वालों को तक बोनस का तोहफा दिया गया है। यह शायद पहला मौका है जब किसी कंपनी ने अपने नए कर्मचारियों को तक बोनस के दायरे में रखा है। इस तरह साधना ने पुराने कर्मचारियों को ही बोनस देने की परंपरा को तोड़कर तारीफ का काम किया है। यकीनन इस तोहफे ने साधना के कर्मचारियों की दिवाली को रंगों से भरने का काम किया है।
साधना के इस फैसले से जहां इस चैनल के कर्मचारी बेहद खुश हैं तो दूसरी तरफ कई दूसरे चैनलों के कर्मचारियों के चेहरों पर मुर्दनी छाई है। यहां तक कि स्टार न्यूज, इंडिया टीवी, इंडिया न्यूज, न्यूज 24 जैसे स्थापित चैनलों में भी दिवाली पर कर्मचारियों को मायूस होना पड़ा है। इससे पहले दशहरे में ईटीवी ग्रुप अपने कर्मचारियों को बोनस का ऎलान कर चुका है। फोकस टीवी में भी दशहरे के मौके पर इन्क्रीमेंट देने की खबर है। जी न्यूज और सहारा समय ने भी अपने कर्मचारियों को बोनस दिया है। जी नेटवर्क ने तो पिछले महीने दिलेरी दिखाते हुए न सिर्फ मंदी खत्म होने का ऎलान कर दिया, बल्कि मंदी के दौरान कर्मचारियों से मिले सहयोग के लिए उन्हें बाकायदा ईमेल भेजकर शुक्रिया अदा भी किया गया। टाइम्स ग्रुप ने दिवाली के मौके पर नवभारत टाइम्स के कर्मचारियों का प्रमोशन किया है और मंदी के दौर में की गई वेतन कटौती वापस ले ली है। लेकिन सबसे ज्यादा शर्म की बात स्टार न्यूज, इंडिया टीवी, इंडिया न्यूज और न्यूज 24 के लिए हैं, जहां हरियाणा चुनाव के दौरान जमकर पैसे कूटने के बावजूद कर्मचारियों को दशहरे-दिवाली पर एक पैसे का भी बोनस नहीं दिया गया।
न्यूज 24 से हेडलाइंस टुडे पहुंचे संतोष
न्यूज 24 से इस्तीफा देने वाले संतोष तिवारी ने हेडलाइंस टुडे को अपना नया ठिकाना बनाया है। संतोष तिवारी न्यूज 24 के बिजनेस हेड थे। वह न्यूज 24 की लांचिंग के समय से ही इससे जुड़े थे। न्यूज 24 में आने से पहले भी संतोष तिवारी बिजनेस न्यूज की दुनिया में एक जाना-माना नाम थे। उन्होंने आज तक जैसे बड़े चैनल से इस्तीफा देकर न्यूज 24 ज्वाइन किया था। तब किसी को को क्या मालूम था कि जोर-शोर से शुरू किया गया यह चैनल इतनी जल्दी ठहर जाएगा। न्यूज 24 से संतोष तिवारी के इस्तीफा देने के बाद इस चैनल की बिजनेस डेस्क बिल्कुल खाली हो गई है।
संतोष तिवारी के बाद डेस्क का जिम्मा प्रोड्यूसर राजीव रंजन को सौंपा गया। लेकिन हाल ही में उन्होंने भी इस्तीफा देकर पी-7 ज्वाइन कर लिया। राजीव रंजन से पहले बिजनेस डेस्क से असिस्टेंट प्रोड्यूसर कम रिपोर्टर अंकिता चतुर्वेदी भी इस्तीफा देकर पी-7 ज्वाइन कर चुकी हैं। आज की तारीख में हालत यह हैं कि न्यूज 24 की बिजनेस डेस्क में एक भी प्रोड्यूसर नहीं है। न्यूज 24 जैसा स्थापित चैनल छोड़कर लोगों का पी-7 जैसे नए चैनलों में जाना न्यूज 24 के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं दे रहा है। इससे पहले भी कई और प्रोड्यूसर और रिपोर्टर इस चैनल को अलविदा कह चुके हैं। कभी अपने क्राइम रिपोर्टर्स के लिए पहचाने जाने वाले बीएजी फिल्म्स के इस चैनल में आज की तारीख में कोई भी सीनियर क्राइम रिपोर्टर नहीं है।
महज कुछ महीनों के अंदर ही इस चैनल के चार क्राइम रिपोर्टर इस्तीफा दे चुके हैं। इस्तीफा देने वाले क्राइम रिपोर्टर हैं आलेक कुमार, नलिनी तिवारी, नीरज कर्ण सिंह और अतुल भाटिया। आलोक कुमार सीबीआई की खबरें कवर करते थे। वह अब दैनिक भास्कर में सीनियर पोजीशन पर हैं। क्राइम रिपोर्टिंग में खासी पकड़ रखने वाले अतुल भाटिया ने इंडिया न्यूज का दामन थाम लिया है। नलिनी तिवारी इसके पहले सनसनी के लिए रिपोर्टिंग करती थीं। नलिनी की भी क्राइम रिपोर्टिंग में अच्छी साख थी। वहीं नीरज कर्ण सिंह न्यूज 24 में कई अच्छी क्राइम रिपोर्ट पेश कर चुके थे। लेकिन चारों ने किसी न किसी वजह से इस चैनल को छोड़ना बेहतर समझा। बताया जाता है कि चैनल के कर्मचारियों में बेहद असंतोष है। स्टॉफ की कमी झेल रहे इस चैनल में दो साल से इन्क्रीमेंट नहीं किया गया है। अच्छी खासी और मजबूत टीम के साथ धमाकेदार शुरूआत करने वाले इस चैनल से आने वाले दिनों में कुछ और विकेट गिर जाएं तो अचरज की बात नहीं।
अमेरिकी पत्रकार की पिटाई पर सरकार संजीदा
नई दिल्ली। अमेरिकी पत्रकार जे. इलियट की बेरहमी से की गईपिटाई के मामले को केंद्र सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। सरकार नेदिल्ली पुलिस से इसका ब्योरा मांगाहै। सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा है कि घटना के शिकार विदेशी पत्रकार की हालत देखने से जाहिरहै कि इस मामले में कानून को हाथ में लिया गया है। पुलिस की पिटाई से आहत विदेशी पत्रकार के अमेरिका लौटने की बात सामने आने के बाद सूचना प्रसारण मंत्री ने इस घटना का ब्योरा मांगा है। अंबिका सोनी ने कहा कि पुलिस की पिटाई के शिकार पत्रकार के जिस्म पर गहरे जख्मों और निशानों से साफ है कि कानून की सीमाएं लांघी गई हैं। उनका कहना था कि दिल्ली पुलिस को कानून-व्यवस्था को लेकर पत्रकार के खिलाफ कोई कार्रवाई करनी थी तो उसकी रिपोर्टदर्ज कर कानूनी कदम उठाना चाहिए था।अंबिकासोनी ने पुलिस की इस थ्योरी पर भी सवाल उठाया कि अमेरिकी पत्रकार कार चुराने की कोशिशकर रहा था। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस के दावे को सच मान भी लिया जाए तो कार्रवाई के कानूनी विकल्प मौजूदथे। लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज करने के बजाय कानून अपने हाथ में ले लिया, जो बेहद गंभीर मामलाहै।गौरतलब है कि इलियट को पुलिस ने दक्षिणी दिल्ली इलाके में कार चुराने का आरोप लगाते हुए पकड़ा था और उनकी बुरी तरहपिटाई की थी। हालांकि अपने स्तर पर ब्योराजुटाने में लगेसूचना प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी पुलिस के इस दावे में सच्चाई नहीं देख रहे।
सुनीत आईआईएमसी के नए डॉयरेक्टर
नई दिल्ली। दूरदर्शन के जरिये बतौर न्यूज रीडर घर-घर में पहचाने जाने वाले सुनीत टंडन अब देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नई दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मॉस कम्युनिकेशन (आईआईएमसी) के डॉयरेक्टर बन गए हैं। वर्तमान में लोकसभा टीवी के सीईओ और जाने माने थियेटर आर्टिस्ट सुनीत टंडन जल्द ही आईआईएमसी के डॉयरेक्टर का पदभार संभाल लेंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इस पद के लिए उनके नाम पर मुहर लगा चुका है। अप्वाइंटमेंट कमेटी ऑफ द कैबिनेट ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। लेकिन औपचारिक रूप से इसका ऐलान तभी किया जाएगा जब सुनीत की तरफ से इसके लिए सहमति मिल जाएगी। पिछले काफी वक्त से आईआईएमसी के डॉयरेक्टर का पद खाली चल रहा था। फिलहाल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्तुति कक्कड़ आईआईएमसी के डॉयरेक्टर का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही थीं।
सुनीत टंडल दूरदर्शन के पुराने न्यूज रीडर्स में से एक हैं। दिल्ली से सेंट स्टीफेंस कालेज से ग्रेजुएट सुनीत थियेटर से भी जुड़े रहे हैं। वह सौ से ज्यादा नाटक कर चुके हैं। आईआईएमसी देश का बेहत प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान माना जाता है। इस संस्थान से निकले छात्र देश भर के अखबारों, पत्रिकाओं, रेडियो, टीवी न्यूज चैनलों के अलावा सरकारी पदों पर अच्छे पदों पर कार्यरत हैं। नए डॉयरेक्टर सुनीत टंडन की अगुवाई में आईआईएमसी के विस्तार की उम्मीद की जा रही है। हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने ऐलान किया था कि देश भर में आईआईएमसी की चार नई शाखाएं खोली जाएंगी।
अदालती रिपोर्टिंग में सावधानी की सलाह
अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाखुशी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने कहा है कि मीडिया में की गई रिपोर्टिंग अक्सर संदर्भ से बाहर होती है, जो न्यायाधीशों के लिए अपने बचाव का कोई अवसर नहीं छोड़ती। न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने कहा कि एक न्यायाधीश किसी रिपोर्ट के बारे में कुछ कह नहीं सकते। हमारी मजबूरी यह है कि हम प्रेस में अपनी बात नहीं रख सकते। पीठ में न्यायमूर्ति एके गांगुली भी थे। विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों के संबंध में याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पीठ की यह नाखुशी सामने आई। पीठ ने चिंता जताई कि पत्रकार उन चीजों की रिपोर्टिंग कर रहे हैं, जो फैसले का हिस्सा नहीं है। वे काफी संवेदनशील मुद्दे हैं। न्यायमूर्ति गांगुली ने कहा कि पत्रकारों की भी ये जिम्मेदारी है कि वह अदालती कार्यवाही की पवित्रता को बनाए रखें।
मानवता की सेवा करेंगे जर्नलिस्ट जैदी
बगदाद। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश पर जूता फेंक कर दुनिया भर में मीडिया की सुर्खियां बटोरने वाले इराकी पत्रकार मुंतजर अल जैदी को जेल से रिहा कर दिया गया। जैदी की रिहाई एक दिन देरी से हो सकी। आखिरी वक्त में जरूरी कागजातों पर दस्तखत नहीं होने की वजह उन्हें 14 की बजाय 15 सितंबर को रिहा किया गया। 30 साल के जैदी को विदेशी मेहमान को अपमानित करने के जुर्म में एक साल कैद की सजा सुनाई गई थी। लेकिन जेल में अच्छे आचरण की वजह से उन्हें जल्द रिहा कर दिया गया।
रिहाई से एक दिन पहले जैदी के भाई दरगाम ने संकेत दिए कि वो सारी पेशकश ठुकराकर और पत्रकारिता को अलविदा कर मानवीय सरोकारों के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि जैदी ने उनसे कहा है कि वह किसी मानवतावादी संगठन में काम करना पसंद करेंगे या फिर महिलाओं और अनाथ बच्चों की मुसीबतों को कम करने के काम में जुटेंगे। हालांकि जैदी के पास कई राजनीतिक पार्टियों के भी प्रस्ताव हैं लेकिन वह राजनीति में किस्मत नहीं आजमाएंगे।
जैदी के इस दुस्साहस को अरब देशों में खूब वाहवाही मिली। जैदी पर इनामों और नौकरियों की बारिश शुरू हो गई। लोगों ने पैसा, घर, कार और यहां तक की बेटी से शादी तक करने की पेशकश कर डाली। जैदी द अलबगदादिया टेलीविजन चैनल के संवाददाता थे। 'अल बगदादिया' के मालिक को उम्मीद है कि जैदी वापस उसके संस्थान में आएंगे। चैनल मालिक ने उसके लिए चार बेडरूम का एक नया घर बनवाया है और एक कार भी उनका इंतजार कर रही है। वहीं मोरक्को में रहने वाले एक इराकी ने जैदी से अपनी बेटी के निकाह की बात कही है। सऊदी अरब से ही एक व्यक्ति ने उसके जूतों के एवज में एक करोड़ डॉलर देने का प्रस्ताव रखा है तो किसी ने सोने से सजा घोड़ा देने की बात कही है। चैनल के संपादक अब्दुल हामिद अल सैज ने कहा कि घटना के बाद जैदी से शादी करने के लिए फलस्तीन से कई महिलाओं के प्रस्ताव भी आए हैं। इसके विपरीत जैदी ने अपने भाइयों मैथम और वरगाम से कहा है कि जेल से रिहा होने के बाद पत्रकारिता के बजाय वह अनाथालय खोलेगा और मानवता की सेवा करेगा।
मुंबई (वीओएम ब्यूरो) देश में 21 हजार करोड़ वाला मीडिया उद्योग 2009 की दूसरी छमाही में 65 फीसदी की दर से विकास करेगा। इस उद्योग के जुलाई-दिसंबर में विकास को लेकर किए गए एक आकलन में इस आशय की संभावना जतायी गई है। इस साल की पहली छमाही के दौरान मीडिया उद्योग में गिरावट दर्ज की गई है।
मैडिसन मीडिया के चेयरमैन सैम बलसारा के मुताबिक जुलाई-दिसंबर को लेकर काफी उम्मीदें बन रही हैं। साल की पहली छमाही में मीडिया उद्योग को 7,452 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी। बलसारा ने उम्मीद जतायी कि दूसरी छमाही के दौरान मीडिया उद्योग की कमाई बढ़कर 12,325 हो जाएगी। बलसारा ने मीडिया उद्योग को लेकर मीडिया उद्योग को लेकर पिच मैडिसन मीडिया एडवरटाइजिंग आउटलुक 2009 नामक एक मध्यावधि आकलन का विमोचन किया। बलसारा ने कहा कि पहली छमाही के बाद मीडिया उद्योग 65 फीसदी की बढ़ी हुई विकास दर हासिल करेगा। यह विकास विज्ञापन की दरें बढ़ने और बड़ी तादाद में मिलने वाले विज्ञापनों की वजह से होगा।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने कई अमेरिकी पत्रकारों और स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) को काली सूची में डालकर उन्हें देश में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया है। पाक का आरोप है कि ये राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल हैं।यह खुलासा अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी की एक चिट्ठी सेहुआ है। हक्कानी ने यह चिट्ठी पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख अहमद शुजा पाशा को भेजी है। 28 जुलाई, 2009 को लिखी गई इस चिट्ठी मेंकहा गया है कि सरकार के इस कदम से पाकिस्तान की छवि खराब हो रही है। हक्कानी ने यह भी कहा है कि अमेरिकी पत्रकारों व एनजीओ को वीजा न देने, उन्हें परेशान करने या धमकाने पर अमेरिका की संसद पाकिस्तान से जवाब-तलब कर सकती है। उस पर आर्थिक और सैन्य पाबंदियां भी लगाई जा सकती हैं। हक्कानी ने इस मामले में आईएसआई प्रमुख से सफाई मांगी है।सार्वजनिक हो चुकी इस चिट्ठी में अमेरिकी संस्थाओं या पत्रकारों को वीजा न देने, उन्हें परेशान करने या उन पर नजर रखने के कुछ मामलों का भी उल्लेख किया गया है। हक्कानी ने शुजा पाशा से प्रतिबंधित संस्थाओं और पत्रकारों की सूची पेश करने को भी कहा है।
प्रसार भारती के सीईओ को सुप्रीम कोर्ट से राहत
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बीएस लल्ली को राहत देते हुए उनके कार्यकारी अधिकार बहाल कर दिए हैं। लल्ली के ये अधिकार हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद वापस ले लिए गए थे। शीर्ष कोर्ट ने हाईकोर्ट के 27 जुलाई के आदेश को स्थगित करते हुए निर्देश दिया कि प्रसार भारती के दैनिक कामकाज तीन सदस्यीय टीम निबटाएगी। इस टीम में सीईओ और बोर्ड के वित्तीय तथा कार्मिक मामलों के सदस्य शामिल होंगे। वैसे, भारत के चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन नीत बेंच ने लल्ली द्वारा हाईकोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती को आंशिक तौर पर स्वीकार किया है। बेंच ने कहा कि लल्ली प्रसार भारती एक्ट के मुताबिक काम करेंगे। एक्ट में कहा गया है कि सीईओ बोर्ड द्वारा सौंपे गए अधिकारों का ही इस्तेमाल करेंगे। इसके साथ ही, शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश के दूसरे हिस्से में हस्तक्षेप नहीं करेगा जिसमें केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने प्रसार भारती कॉपरेरेशन की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच का निर्देश दिया है। कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस निर्देश पर भी रोक लगा दी कि बोर्ड बैठकों की हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जेपी सिंह की मौजूदगी में वीडियोग्राफी होनी चाहिए। सिंह को स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था।
जी में दो पत्रकारों को स्वाइन फ्लू, बांटे गए मास्क
नोएडा (वीओएम ब्यूरो), देश भर को स्वाइन फ्लू से बचने की सलाह देने वाले और इस बीमारी को राष्ट्रीय आपदा की तरह पेश करने वाले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी स्वाइन फ्लू की टेढ़ी नजर पड़ गई है। स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया है देश का सबसे बड़ा मीडिया ग्रुप जी नेटवर्क। खबर है कि जी के नोएडा स्थित ऑफिस में दो पत्रकारों को स्वाइन फ्लू हो गया है। इनमें से एक तो जी न्यूज के वरिष्ठ संवादताता बताए जाते हैं और दूसरे चैनल प्रोड्यूसर हैं। इस खबर के बाद पूरे नोएडा आफिस में स्वाइन फ्लू को लेकर हड़कंप है। बताया जाता है कि इस बाबत मैनेजमेंट और एचआर डिपार्टमेंट ने बाकायदा एक आंतरिक मेल जारी किया है। इस ईमेल में जी के कर्मचारियों और अधिकारियों को स्वाइन फ्लू के संक्रमण से सचेत रहने को कहा गया है। जी न्यूज में स्वाइन फ्लू की खबर नीचे से लेकर ऊपर तक फैल चुकी है। स्वाइन फ्लू के कहर से अपने कर्मचारियों को बचाने के लिए जी का मैनेजमेंट पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब शुक्रवार की शाम ऑफिस में मुफ्त मास्क भी बंटवाए गए। ऑफिस में इस मास्क को पहनने की कड़ी हिदायत भी जारी की गई है, ताकि नेटवर्क के बाकी पत्रकारों में स्वाइन फ्लू न फैलने पाए।
तालिबान के कब्जे से छूटा न्यूयार्क टाइम्स का रिपोर्टर
काबुल। उत्तरी अफगानिस्तान में अगवा किए गए न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर स्टीफन फारेल को ब्रिटेन के कमांडो ने तालिबान के चंगुल से छुड़ा लिया। कमांडो कार्रवाई के दौरान रिपोर्टर का दुभाषिया मारा गया। रिपोर्टर स्टीफन और उसके दुभाषिये सुलतान मुनादी को कुंदूज प्रांत में अगवा कर लिया गया था। आतंकवादियों के दो तेल टैंकरों पर कब्जे और नाटो के हमले में आम लोगों के मारे जाने की खबरें रिपोर्ट करने के लिए फारेल कुंदूज गए थे। अफगानी अफसरों ने तेल टैंकर पर बम गिराए जिससे हुए विस्फोट में 70 लोग मारे गए। मरने वालों में वह ग्रामीण भी थे जो टैंकर से तेल इकट्ठा करने के मौके पर पहुंचे थे। फारेल उन्हीं लोगों का इंटरव्यू लेना चाहते थे। रेस्क्यू ऑपरेशन में एक ब्रिटिश कमांडो के भी मारे जाने की खबर है।
चैनल में अफेयर न होने का अफसोस
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का शार्ट कट
मत पीटिए मीडिया के 'प्रोफेशनल' होने का ढिंढोरा
भविष्य के पत्रकारों का सामान्य (अ)ज्ञान
शर्मसार करता एक 'जनवादी' अखबार
वह न्यूज चैनल का प्रोड्यूसर है
न्यूज चैनल के लिए तत्काल चाहिए
रेडियो मिर्ची की दिलचस्प कहानी
बिहारी हो, तो मीडिया में नौकरी पक्की!
25 बरस का हो गया 'प्रभात खबर'
झारखंड का लोकप्रिय अखबार प्रभात खबर 25 साल का हो गया है। 14 अगस्त को अखबार के 25 बरस पूरे होने पर झारखंड की राजधानी के 'रांची क्लब' में अखबार का रजत जयंती समारोह मनाया गया। इस अवसर पर लेखन और पत्रकारिता से जुड़े कई लोगों को सम्मानित किया गया। समारोह का उद्घाटन राज्यपाल के शंकर नरायणन ने किया। 1984 में शुरु हुआ प्रभात खबर एक वक्त बंद होने के कगार पर आ गया था, लेकिन आईआरएस सर्वे के मुताबिक आज की तारीख में इस अखबार की प्रसार संख्या 3.59 लाख तक पहुंच चुकी है। प्रभात खबर झारखंड का सबसे विश्वसनीय अखबार बन चुका है। झारखंड के अलावा यह बिहार और पश्चिम बंगाल से भी प्रकाशित होता है।
एफएम पर समाचार नहीं
निजी एफएम रेडियो चैनलों से फिलहाल समाचार नदारद ही रहेंगे। इस फैसले से सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर वह कोई समझौता नहीं करेगी। कमाई न होने का रोना रोते हुए कई एफएम रेडियो चैनलों ने समाचारों के प्रसारण की इजाजत मांगी थी। लेकिन सरकार ने साफ किया है कि वह निजी एफएम चैनलों को अपने समाचार बुलेटिन के प्रसारण की इजाजत नहीं देगी। हालांकि सरकार की तरफ से इतना जरूर कहा गया है कि निजी एफएम चैनलों को आकाशवाणी के समाचारों का पुन: प्रसारण की इजाजत दी जा सकती है।
दरअसल गृह मंत्रालय और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां सुरक्षा के मद्देनजर निजी एफएम रेडियो को समाचारों की छूट न देने के पक्षधर हैं। उनकी दलील है कि निजी न्यूज चैनलों को मानीटर करने से कहीं ज्यादा मुश्किल है एफएम चैनलों पर नजर रखना। वहीं एफएम चैनल चला रही कंपनियों की दलील है कि निजी एफएम रेडियो और टीवी चैनलों के लिए अलग-अलग मानदंड गैरवाजिब है।
सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी का कहना है कि सरकार निजी एफएम रेडियो की जरूरतों को देखते हुए उन्हें आकाशवाणी के समाचारों को ही अपने चैनलों पर प्रसारण की इजाजत देने पर विचार कर रही है।निजी एफएम आल इंडिया रेडियो के समाचारों का लाइव प्रसारण करेंगे या रिकार्डिग सुनाएंगे और इसके लिए उन्हें प्रसार भारती को कुछ न्यूनतम शुल्क का भुगतान करना होगा या नहीं, इस बारे में अभी कुछ तय नहीं है।
अंबिका सोनी का इस बारे में कहना था कि समाचारों के प्रसारण की छूट देने के स्वरूप पर विचार किया जा रहा है। एफएम चैनल की समस्याओं पर गौर करने के बाद सरकार की योजना एफएम रेडियो के तीसरे चरण के विस्तार पर टिकी है। इस विस्तार में सरकार की योजना देश के छोटे-छोटे शहरों तक एफएम रेडियो को पहुंचाने की है।
रीजनल हिंदी न्यूज चैनलों की दुनिया का कामयाब खिलाड़ी साधना ग्रुप अगले साल अपना नेशनल न्यूज चैनल भी लांच करने की तैयारी में है। साधना ग्रुप के फिलहाल दो न्यूज चैनल ऑन एयर हैं। साधना न्यूज बिहार-झारखंड और साधना न्यूज एमपी-छत्तीसगढ़। दोनों न्यूज चैनल अपने राज्यों के दर्शकों में खासी पकड़ बना चुके हैं। दोनों फ्री टू एयर चैनलों की कामयाबी से उत्साहित ग्रुप अगली छमाही में अपना नया चैनल यूपी-उत्तराखंड न्यूज लांच करने वाला है। साधना मीडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभात डबराल के मुताबिक इस साल ग्रुप कम से कम 5 रीजनल न्यूज चैनल लांच करेगा। ग्रुप की योजना यूपी-उत्तराखंड के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के लिए अलग न्यूज चैनल लाने की है। ग्रुप की योजना है कि वह रीजनल चैनलों को लोकप्रिय बनाने के बाद ही नेशनल चैनल की श्रेणी में कदम रखे। साधना मीडिया ग्रुप ने जिस हिसाब से कामयाबी के साथ रीजनल न्यूज चैनलों की दुनिया में कदम बढ़ाए हैं उसे देखकर तो यही लग रहा है कि उसके नेशनल चैनल को भी पहचान बनाने में देर नहीं लगेगी।