अब हिंदी में होगा डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू..!
इंटरनेट में दिन-प्रतिदिन अपनी मौजूदगी और ताकत का एहसास करा रही हिंदी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसी दिशा इंटरनेट पर हिंदी एक और कदम बढ़ाने जा रही है। मौजूदा व्यवस्था के तहत इंटरनेट पर कोई भी वेबसाइट या ब्लॉग पर जाने के लिए आप सबसे पहले एड्रेस बार पर अंग्रेजी में उसका वेब एड्रेस टाइप करते हैं। जैसे www.voiceofmedia.com. अब जरा सोचिए कि अगर ऎसी व्यवस्था हो जाए कि वेब पते हिंदी में भी मिलने लगें तो कैसा रहेगा। यह विचार जल्द ही हकीकत का रूप लेने वाला है। तब आप अंग्रेजी में नहीं बल्कि हिंदी में टाइप करेंगे कुछ इस तरह..डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट वॉयस ऑफ मीडिया डॉट कॉम। यकीनन आप यह जानकर रोमांचित हो रहे होंगे। जल्द ही यह कल्पना साकार होने वाली है। इतना ही नहीं, हिंदी से भी दो कदम आगे बढ़कर आने वाले वक्त में आपको तमिल, तेलुगू, बंगाली और मराठी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में भी वेब पते उपलब्ध होंगे। लेकिन यह परिकल्पना हकीकत में तब बदलेगी जब इंटरनेट कॉर्पोरेशन फॉर असाइन्ड नेम्स ऐंड नंबर्स (आईसीएएनएन) इसे हरी झंडी दिखाएगा। अगर वेब पते हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होने लगे तो भारत में ना सिर्फ तेजी से इंटरनेट का प्रसार होगा, बल्कि इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की तादाद मौजूदा पांच करो़ड़ से बढ़कर कई गुना हो जाएगी।
आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में फिलहाल 160 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से 50 फीसदी से ज्यादा लोग लैटिन के अलावा दूसरे अक्षरों वाली लिपि पर आधारित भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं। डोमेन नामों पर नजर रखने वाले गैर मुनाफे वाले संगठन आईसीएएनएन ने इसी हफ्ते दुनिया भर से अपने प्रतिनिधियों की बैठक सियोल में बुलाई है। इस बैठक में वेब पते हिंदी और तमिल में दिए जाने पर फैसला होगा। अगर ऐसा हो गया तो इंटरनेट के 40 साल के इतिहास का यह सबसे बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव होगा। इसके बाद गैर अंग्रेजी डोमेन नामों के आवेदन भी स्वीकार होने लगेंगे और अगले साल की दूसरी छमाही में ऐसे नाम मिलने भी लगेंगे।
मनचाहे सफिक्स भी मिलेंगे वेब पर नामों में फिलहाल 21 सफिक्स (वेब पते के अंत में इस्तेमाल होने वाले शब्द जैसे डॉट इन, डॉट कॉम, डॉट यूके आदि) लगाए जाते हैं। इनमें डॉट कॉम सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। तकरीबन 80 फीसदी वेब पतों में डॉट कॉमका इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा डॉट नेट, डॉट इन्फो या देश से संबंधित सफिक्स जेसे डॉट इन, डॉट यूके, डॉट पीके भी इस्तेमाल होते हैं। लेकिन अगर नए बदलाव हो जाते हैं, तो आपको डॉट इंडियन, डॉट मुंबई, डॉट दिल्ली, डॉट अमिताभ बच्चन, डॉट पेरिस जैसे सफिक्स भी अपने वेब पते के अंत में लगाने को मिल जाएंगे। लेकिन इन विशेष सफिक्स के लिए आपको खासीकीमत भी अदा करनी होगी। यह कीमत 40 लाख से लेकर 2 करोड़ रुपये के बीच कुछ भी हो सकती है। कॉर्पोरेट दिग्गज भी डॉट टाटा, डॉट अंबानी, डॉट बिड़ला और डॉट रिलायंस जैसे नामों के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी नेट4इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ जसजीत साहनी ने मानते हैं कि भारत में इसमें कुछ वक्त लग जाएगा क्योंकि तकनीकी दिक्कतें रोड़ा बनेंगी। दरअसल फिलहाल आप हिंदी में दुकान शब्द तो टाइप कर सकते हैं, लेकिन डॉट कॉम को हिंदी में टाइप नहीं किया जा सकता। इस मामले में आईसीएएनएन सभी देशों के सूचना प्रौद्योगिकी विभागों से बात कर रहा है ताकि डॉट कॉम का सही अर्थ हिंदी या तमिल में मिल सके। साहनी कहते हैं, 'डॉट कॉम को हिंदी में क्या कहेंगे? आपको इसका फैसला तो करना ही होगा।'
इस बैठक में हिस्सा लेने सियोल जा रहे सिफी टेक्नोलॉजिज के सरकारी मामलों के अध्यक्ष नरेश अजवाणी भी मानते हैं कि वेब पते स्थानीय भाषा में देना भारत जैसे देशों के लिए बहुत अच्छा होगा। उन्होंने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के पास 22 स्थानीय भाषाओं के फॉन्ट पहले से मौजूद हैं, इसलिए इस काम में दिक्कत नहीं आनी चाहिए। भारत की क्षेत्रीय भाषाओं की बात करें तो सबसे पहले यूआरएल (वेब एड्रेस) को मराठी भाषा में लाने की तैयारी है। बाद में सभी 22 क्षेत्रीय भाषाओं में भी वेब पते उपलब्ध कराए जाएंगे। (बिजनेस स्टैंडर्ड की एक खबर पर आधारित)
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