जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो
वॉयस ऑफ मीडिया के पाठकों ने कई बार हमसे इस विषय में जानना चाहा है कि अपनाएक अखबार या पत्रिका निकालने के लिए उन्हें क्या करना होगा। पाठकों की इसी मांग को देखते हुए हम किस्तों में यह जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। जानकारी दे रहे हैं वरिष्ठ लेखक शिवप्रसाद भारती। आपको यह आलेख कैसा लगा, इस संबंध में अपनी प्रतिक्रियाओं से जरूर अवगत कराएं-संपादक। editor@voiceofmedia.com
अगर आप अपने आसपास होने वाली घटनाओं को लेकर संवेदनशील हैं, किसी के प्रति अन्याय और गलत बात, गलत रवैया देखकर आप आहत होते हैं। परेशान होते हैं। अपनी बात, अपना नजरिया लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, तो इसके लिए बेहद सशक्त और सबसे पुराना जरिया है प्रिंट मीडिया। अगर आप समाज में होने वाली घटनाओं पर अपना कोई नजरिया रखते हैं। उसे व्यक्त करने की इच्छा रखते हैं तोआप खुद का अखबार या पत्रिका प्रकाशित कर सकते हैं। अखबार की ताकत के बारे में मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी ने कहा था, 'खींचो न कमान न तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो'। शायर ने जो सलाह दी है उसका मतलब अपना अखबार निकालने से है। जिन दिनों यह बात कही गई उस वक्त इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया का विकास नहीं हुआ था शायद इसीलिए उन्होंने अखबार निकालने की राह दिखाई। लेकिन आज के दौर में भी अखबार की ताकत का कोई मुकाबला नहीं है।
अपना अखबार या पत्रिका निकालने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होती है। इसके लिए सरकार ने प्रेस एवं रजिस्ट्रेशन एक्ट बनाया है।जो भी व्यक्ति या संस्था अखबार निकालना चाहते हैं उन्हें पत्रकारिता की भाषा में प्रकाशक कहेंगे। अखबार में छपने वाली सभी समाग्री के लिए कानूनी तौर परप्रकाशक ही जिम्मेदार होता है। इसके बाद मुद्रक की भी खासी अहमियत होती है। मुद्रक वह व्यक्ति है जो अखबार छापता है। तकनीकी रूप से मुद्रक वह हुआ, जिसके प्रेस में आपका अखबार छापा जाएगा। लेकिन कानूनी पचड़ों से बचने के लिए प्रेस मालिक आमतौर पर इसकी जिम्मेदारी नहीं लेते। इसलिए ज्यादातर कि प्रकाशक को ही मुद्रक की भी जिम्मेदारी लेनी पड़ती है। चाहे वह खुद के प्रेस से अखबार छापे या फिर किसी और के प्रेस से अखबार छपवाए।
प्रकाशक और मुद्रक के साथ ही संपादक का पद भी सबसे अहम है। संपादक किसी भी अखबार या पत्रिका में प्रकाशित विषय सामग्री (खबरें, लेख इत्यादि) के लिए जिम्मेदार होता है। अखबार में छपे किसी लेख, खबर आदि पर अगर किसी को आपत्ति है तो इसके लिए संपादक को जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन अखबार में अगर कुछ आपत्तिजनक छपता है तोकानूनी तौर पर इसके लिए संपादक, मुद्रक और प्रकाशक तीनो जिम्मेदार होते हैं। छोटे अखबारों और पत्रिकाओं में आमतौर पर मालिक ही संपादक, मुद्रक और प्रकाशक की भूमिका निभाता है। इसके दो फायदे हैं। पहला तो यह कि कागजी कार्रवाई में थोड़ी सहूलियत हो जाती है और दूसरी यह किअखबार निकालने का खर्च कम हो जाता है।
जो भी व्यक्ति या संस्था अपना अखबार-पत्रिका निकालने चाहते हैं और उसका मालिकाना हक भी अपने ही पास रखना चाहते हैं उन्हें सबसे पहले अपने अखबार या पत्रिका का टाइटल यानी शीर्षक (जैसे-नंदन, हिंदुस्तान, अमर उजाला आदि) रजिस्टर्ड करवाना होता है। ऎसे व्यक्ति को सबसे पहले एक निर्धारित फॉर्म (भाग-1) भरकर अपने जिले के जिला मजिस्ट्रेट (दिल्ली में हैं तो पुलिस आयुक्त) के जरिये आवेदन पत्र रजिस्ट्रार न्यूज पेपर्स ऑफ इंडिया (आरएनआई), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार, पश्चिमी खंड, स्कंध-2, आर के पुरम, नई दिल्ली-110066 को भेजना होता है।
रजिस्ट्रार को आवेदन भेजने से पहले शीर्षक यानी टाइटलपर माथापच्ची कर लेना जरूरी है। देश भर से हजारों-लाखों पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं। सभी का रजिस्ट्रेशन रजिस्ट्रार ऑफिस दिल्ली में ही होता है। इसलिए अच्छे और लोकप्रियटाइटल का बेहद अकाल है। होता यह है कि आप जो प्रस्तावित शीर्षक रजिस्ट्रेशन के लिए भेजते हैं वह पहले ही किसी और के नाम रजिस्टर्ड होता है। लिहाजा आवेदन निरस्त हो जाता है और वहां सेदोबारा आवेदन करने को कहा जता है। इसलिए सबसे पहले कुछ नामों की सूची तैयार कर लेना चाहिए। सबसे अच्छा तो ये होगा कि आप आरएनआई की वेबसाइट पर जाकर ये चेक कर लें कि जो टाइटल आप चाहते हैं वह उपलब्ध है या नहीं। नाम भी ऎसे होने चाहिए जो पहले से लोकप्रिय न हों। ऎसे कम से कम छह नाम यानी टाइटल फाइनल करके प्राथमिकता क्रम में लिखना चाहिए। इन्हीं छह में से जो टाइटल उपलब्ध होगा आपको आवंटित कर दिया जाएगा।
निर्धारित फॉर्म भरने के बाद आवेदन पत्र जिले के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी या नगर मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करना होता है, जो इसे बाकी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रजिस्ट्रार कोफॉरवर्ड करते हैं। राजधानीदिल्ली में इस आवेदन को पुलिस आयुक्त की तरफ से अपर पुलिस आयुक्त फॉरवर्ड करते हैं। दरअसल इन अधिकारियों के जरिये आवेदक या संस्था के बारे में इन्क्वॉयरी की जाती है। वेरिफिकेशन किया जाता है।जैसे आवेदक का प्रोफाइल कैसा है? उसका कोई क्रिमिनल रिकार्ड तो नहीं है आदि-आदि। वेरिफिकेशन के बाद अगर सही रिपोर्ट आती है तो उस आवेदन पत्र को रजिस्ट्रार न्यूज पेपर्स ऑफ इंडिया को भेज दिया जाता है। आरएनआई को भेजे गए आपके अप्लीकेशन का स्टेटस क्या है यह भी आप उसकी वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं।
पिछले साल तक रजिस्ट्रार ऑफिस टाइटल रजिस्ट्रेशन फार्म में बहुत कम जानकारी मांगता था, लेकिन अब आवेदक की शैक्षिक योग्यता, व्यवसाय, इनकम, इनकम का जरिया, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पासपोर्ट की अटेस्टेड फोटो कॉपी भी मांगने लगा है। इस मकसद यही है कि अखबार प्रकाशन के व्यवसाय में पढ़े-लिखे और विचारवान लोग ही उतर सकें। अगली किस्त में पढ़िये कि आरएनआई से टाइटल मिलने के बाद आपको क्या करना होगा। (लेखक शिवप्रसाद भारती उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में डिप्टी डॉयरेक्टर के पद पर हैं और वर्तमान में लखनऊ में तैनात हैं)
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